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“वर्तमान में समाज में फैल रहे असहिष्णु रिश्तो के दौर में समाज को जो पिछड़े एवं कमजोर वर्ग के लोग हैं, जोड़ने हेतु यह मेरा प्रथम प्रयास है जिसमें एक दलित जो घने जंगलों में निवास करती है ,जिसके आसपास दूर-दूर तक कोई भी व्यक्ति नहीं है और वह सिर्फ राम की प्रतीक्षा में है, ऐसी दलित और पिछड़ी जिंदगीयों के बारे में दृष्टिपात किया है, लेखक का यह प्रयास आप सबको जरूर पसंद आएगा। वहीं दूसरी और धर्म से लोग बिछड़ते जा रहे हैं वे अपने संस्कार रीति-रिवाज भूलते जा रहे हैं, परिवार में व्यक्त आक्रोश , घुटन व्यर्थ की चकाचौंध, श्रद्धा और सबुरी खोते लोग, इन सारे बिंदुओं पर रचनाकार ने कुशलता से अपनी कलम चलाने का प्रयास किया है।
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