Pratinidhi Kahaniyan : Shivani

Prijzen vanaf
1,46

Uitgelicht

Beschrijving

Bol शिवानी कुशल कथाशिल्पी भी थीं, और रूढ़िभंजक भी। उनकी कहानियों में एक दुचित्ते रूढ़िवादी और पिता केन्द्रित समाज की कई विडम्बनाएँ हम साफ पढ़ सकते हैं। बेटों की उत्कट कामना, लड़की को दूसरे दर्जे का जीव मानकर उस पर तमाम तरह के अंकुश, शादी-ब्याह तय करने के चतुर छल-कपटमय दाँव-पेंच, और युवा लड़कियों के विद्रोही तेवर सबको उन्होंने भरपूर जिया भी और दर्ज भी किया है। उनमें हमको 60 से 90 तक के युग के निरन्तर बदल रहे पर पितृसत्ताक मूल्यों के पक्षधर भारतीय राज समाज की घरेलू तथा कामकाजी औरतों के जीवन की कई अनकही सचाइयों का बेबाक दर्शन होता है, जो सामान्यत: पुरुष लेखकों ने बहुत कम पकड़ा है। पकड़ा भी है तो सेक्स या मातृत्व के भावुक चित्रण तक ही सीमित होकर। विचार और संशय, श्रद्धा और बुद्धि के बीच पाठक को निरन्तर चलायमान रखती शिवानी की इन कहानियों में हम आज भी कथा की चौखट लाँघकर मानव जीवन की सनातनता को छू सकते हैं।

Vergelijk aanbieders (1)

Sorteren op:

€ 1,98 € 1,46 Gratis verzending

Beschrijving (1)

शिवानी कुशल कथाशिल्पी भी थीं, और रूढ़िभंजक भी। उनकी कहानियों में एक दुचित्ते रूढ़िवादी और पिता केन्द्रित समाज की कई विडम्बनाएँ हम साफ पढ़ सकते हैं। बेटों की उत्कट कामना, लड़की को दूसरे दर्जे का जीव मानकर उस पर तमाम तरह के अंकुश, शादी-ब्याह तय करने के चतुर छल-कपटमय दाँव-पेंच, और युवा लड़कियों के विद्रोही तेवर सबको उन्होंने भरपूर जिया भी और दर्ज भी किया है। उनमें हमको 60 से 90 तक के युग के निरन्तर बदल रहे पर पितृसत्ताक मूल्यों के पक्षधर भारतीय राज समाज की घरेलू तथा कामकाजी औरतों के जीवन की कई अनकही सचाइयों का बेबाक दर्शन होता है, जो सामान्यत: पुरुष लेखकों ने बहुत कम पकड़ा है। पकड़ा भी है तो सेक्स या मातृत्व के भावुक चित्रण तक ही सीमित होकर। विचार और संशय, श्रद्धा और बुद्धि के बीच पाठक को निरन्तर चलायमान रखती शिवानी की इन कहानियों में हम आज भी कथा की चौखट लाँघकर मानव जीवन की सनातनता को छू सकते हैं।


Productspecificaties

EAN
  • 9789395737500
Maat


Prijshistorie

Prijzen voor het laatst bijgewerkt op:

Uitgelichte Keuze
1,46
Naar shop