मैं ज़िंदा हूँ
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मैं जिंदा हूं एक स्त्री की प्रेरणादायक कहानी है जो संघर्षों के बाद भी हार नहीं मानती। हना खान एक तलाकशुदा मां है, जो समाज की बंदिशों और पितृसत्ता के विरुद्ध खड़ी होती है। शिक्षा के बल पर वह बीए ऑनर्स संस्कृत में टॉपर बनती है और फिर यूपीएससी पास कर आईपीएस अधिकारी बनती है। यह कहानी महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता, शिक्षा और जीवन में दूसरे मौके के महत्व को दर्शाती है। हना का जीवन यह संदेश देता है कि हर स्त्री में पुनर्जन्म की शक्ति होती है, अगर उसे अवसर और आत्मसम्मान मिले।
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मैं जिंदा हूं एक स्त्री की प्रेरणादायक कहानी है जो संघर्षों के बाद भी हार नहीं मानती। हना खान एक तलाकशुदा मां है, जो समाज की बंदिशों और पितृसत्ता के विरुद्ध खड़ी होती है। शिक्षा के बल पर वह बीए ऑनर्स संस्कृत में टॉपर बनती है और फिर यूपीएससी पास कर आईपीएस अधिकारी बनती है। यह कहानी महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता, शिक्षा और जीवन में दूसरे मौके के महत्व को दर्शाती है। हना का जीवन यह संदेश देता है कि हर स्त्री में पुनर्जन्म की शक्ति होती है, अगर उसे अवसर और आत्मसम्मान मिले।
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मैं जिंदा हूं एक स्त्री की प्रेरणादायक कहानी है जो संघर्षों के बाद भी हार नहीं मानती। हना खान एक तलाकशुदा मां है, जो समाज की बंदिशों और पितृसत्ता के विरुद्ध खड़ी होती है। शिक्षा के बल पर वह बीए ऑनर्स संस्कृत में टॉपर बनती है और फिर यूपीएससी पास कर आईपीएस अधिकारी बनती है। यह कहानी महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता, शिक्षा और जीवन में दूसरे मौके के महत्व को दर्शाती है। हना का जीवन यह संदेश देता है कि हर स्त्री में पुनर्जन्म की शक्ति होती है, अगर उसे अवसर और आत्मसम्मान मिले।
AmazonPages: 84, Paperback, Ayush Kumar Singh
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