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राही की कलम से - ख्वाब और ख़ामोशी (कुछ अनकहे एहसास) एक ओर हैं ख्वाब- जो रातों की आँखों में पलते हैं, उम्मीदों में ढलते हैं, और कभी-कभी सुबह होने से पहले ही टूटकर किसी ख़ामोशी में छिप जाते हैं। दूसरी ओर है ख़ामोशी - जो चुप रहकर भी वो सब कुछ कह जाती है, जो लफ़्ज़ों में बयां नहीं हो पाता। यह किताब सिर्फ कविताओं का नहीं, बल्कि एक एहसास का सफ़र है। इन रचनाओं में न कोई शोर है, न दिखावा - बस एक सच्चा, सीधा संवाद है दिल से दिल तक।
AmazonPages: 40, Paperback, Bookleaf Publishing
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