जुगनू
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"जुगनू" सिर्फ़ कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन की उन झिलमिलाहटों का दर्पण है जो अंधकार में भी उजाला खोजती हैं। इसमें संकलित रचनाएँ आशा, प्रेम, संघर्ष, संवेदनाओं और जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को छूती हैं। हर कविता मानो एक जुगनू की तरह है-छोटी सी पर चमकदार-जो पाठक के भीतर रोशनी जगाती है। यह पुस्तक उन क्षणों को शब्द देती है जब मन अकेला होता है, जब सवाल भारी लगते हैं, और जब आत्मा उम्मीद ढूँढती है। जुगनू पाठकों को यह विश्वास दिलाती है कि चाहे अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, भीतर और बाहर कहीं न कहीं उजाला ज़रूर है।
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"जुगनू" सिर्फ़ कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन की उन झिलमिलाहटों का दर्पण है जो अंधकार में भी उजाला खोजती हैं। इसमें संकलित रचनाएँ आशा, प्रेम, संघर्ष, संवेदनाओं और जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को छूती हैं। हर कविता मानो एक जुगनू की तरह है-छोटी सी पर चमकदार-जो पाठक के भीतर रोशनी जगाती है। यह पुस्तक उन क्षणों को शब्द देती है जब मन अकेला होता है, जब सवाल भारी लगते हैं, और जब आत्मा उम्मीद ढूँढती है। जुगनू पाठकों को यह विश्वास दिलाती है कि चाहे अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, भीतर और बाहर कहीं न कहीं उजाला ज़रूर है।
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"जुगनू" सिर्फ़ कविताओं का संग्रह नहीं, बल्कि जीवन की उन झिलमिलाहटों का दर्पण है जो अंधकार में भी उजाला खोजती हैं। इसमें संकलित रचनाएँ आशा, प्रेम, संघर्ष, संवेदनाओं और जीवन की छोटी-छोटी खुशियों को छूती हैं। हर कविता मानो एक जुगनू की तरह है-छोटी सी पर चमकदार-जो पाठक के भीतर रोशनी जगाती है। यह पुस्तक उन क्षणों को शब्द देती है जब मन अकेला होता है, जब सवाल भारी लगते हैं, और जब आत्मा उम्मीद ढूँढती है। जुगनू पाठकों को यह विश्वास दिलाती है कि चाहे अंधेरा कितना भी गहरा क्यों न हो, भीतर और बाहर कहीं न कहीं उजाला ज़रूर है।
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