Hriday Spandan
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"साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं बल्कि प्रेरणा स्त्रोत भी है. अतः देश और समाज के निर्माण में अति महत्वपूर्ण है. “समाज में व्याप्त बुराइयों और अच्छाइयों का आइना दिखाता है साहित्य. देश समाज के निर्माण हेतु, आम जनता को सही राह दिखाता है साहित्य. इसलिए साहित्य की भाषा शैली सरल तथा रोमांचक होनी चाहिए. तथा उसमें निहित सीख सद्मार्गी और प्रभावशाली होनी चाहिए.” मेरी दृढ मान्यता है कि देश या समाज का उत्थान हो अथवा व्यक्ति का चरित्र निर्माण उसके लिए लगातार प्रयास जरुरी है अन्यथा पतन तो स्वतः ही हो जाता है. आज समाज में शिक्षा का तो खूब विकास हो रहा है मगर दुर्भाग्यवश नैतिकता का स्तर उत्तरोत्तर गिर रहा है. अतः भावी असहिष्णुता को टालने के लिए संवेदनशील व्यक्तिओं को खुलकर आवाज उठाना आवश्यक है. अपने चारो तरफ घटित होने वाले पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, प्राकृतिक, देशभक्ति, नैतिक, चरित्र निर्माण, मनोरंजन इत्यादि घटनाक्रमों से प्रभावित होकर, ह्रदय पटल से उठी तरंगो की अभिव्यक्ति को सन २००१ से कलमबद्ध करता आ रहा हूँ इसलिए मैंने अपनी काव्य कृतियों को ‘ह्रदय स्पंदन’ श्रंखला के नाम से प्रकाशित करने का निर्णय लिया है. मेरे विचारों से ओत प्रोत ५० कविताओ का, सन २०२२ में प्रथम कविता संग्रह प्रकाशित हो चूका है तथा अब मेरी नव रचित ७५ मौलिक कविताओ का यह द्वितीय कविता संग्रह, ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के शुभ अवसर पर, मेरी तरफ से एक छोटे से योगदान के रूप में, देश को समर्पित है निवृत्त सेवा काल में, अपने अनुभवों और क्षमताओं के सदुपयोग से, अपना योगदान प्रदान करने का साहित्य ही एक उत्तम माध्यम है. इसलिए ‘सोश्यल मीडिया’, ‘प्रिंट मीडिया’ तथा ‘दृश्य-श्राव्य मीडिया’ के जरिये समाज से जुड़कर जन जाग्रति लाने की दिशा में कदम बढ़ायें हैं. आशा है मेरी रचनायें अंशमात्र ही सही परन्तु आम जनता को सद्मार्ग की दिशा दिखायेंगी. इन कविताओं को विविध हिंदी साहित्य मंचों तथा सोश्यल मीडिया पर खूब सारा प्यार और सम्मान मिला है. आशा करता हूँ कि यह कविता संग्रह, जीवन उपयोगी विविध पहलुओ पर, भरपूर मनोरंजन के साथ साथ, उमदा शिक्षा संदेशों की, पाठक गण पर, अमिट छाप छोड़ेगा."
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"साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं बल्कि प्रेरणा स्त्रोत भी है. अतः देश और समाज के निर्माण में अति महत्वपूर्ण है. “समाज में व्याप्त बुराइयों और अच्छाइयों का आइना दिखाता है साहित्य. देश समाज के निर्माण हेतु, आम जनता को सही राह दिखाता है साहित्य. इसलिए साहित्य की भाषा शैली सरल तथा रोमांचक होनी चाहिए. तथा उसमें निहित सीख सद्मार्गी और प्रभावशाली होनी चाहिए.” मेरी दृढ मान्यता है कि देश या समाज का उत्थान हो अथवा व्यक्ति का चरित्र निर्माण उसके लिए लगातार प्रयास जरुरी है अन्यथा पतन तो स्वतः ही हो जाता है. आज समाज में शिक्षा का तो खूब विकास हो रहा है मगर दुर्भाग्यवश नैतिकता का स्तर उत्तरोत्तर गिर रहा है. अतः भावी असहिष्णुता को टालने के लिए संवेदनशील व्यक्तिओं को खुलकर आवाज उठाना आवश्यक है. अपने चारो तरफ घटित होने वाले पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, आध्यात्मिक, प्राकृतिक, देशभक्ति, नैतिक, चरित्र निर्माण, मनोरंजन इत्यादि घटनाक्रमों से प्रभावित होकर, ह्रदय पटल से उठी तरंगो की अभिव्यक्ति को सन २००१ से कलमबद्ध करता आ रहा हूँ इसलिए मैंने अपनी काव्य कृतियों को ‘ह्रदय स्पंदन’ श्रंखला के नाम से प्रकाशित करने का निर्णय लिया है. मेरे विचारों से ओत प्रोत ५० कविताओ का, सन २०२२ में प्रथम कविता संग्रह प्रकाशित हो चूका है तथा अब मेरी नव रचित ७५ मौलिक कविताओ का यह द्वितीय कविता संग्रह, ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के शुभ अवसर पर, मेरी तरफ से एक छोटे से योगदान के रूप में, देश को समर्पित है निवृत्त सेवा काल में, अपने अनुभवों और क्षमताओं के सदुपयोग से, अपना योगदान प्रदान करने का साहित्य ही एक उत्तम माध्यम है. इसलिए ‘सोश्यल मीडिया’, ‘प्रिंट मीडिया’ तथा ‘दृश्य-श्राव्य मीडिया’ के जरिये समाज से जुड़कर जन जाग्रति लाने की दिशा में कदम बढ़ायें हैं. आशा है मेरी रचनायें अंशमात्र ही सही परन्तु आम जनता को सद्मार्ग की दिशा दिखायेंगी. इन कविताओं को विविध हिंदी साहित्य मंचों तथा सोश्यल मीडिया पर खूब सारा प्यार और सम्मान मिला है. आशा करता हूँ कि यह कविता संग्रह, जीवन उपयोगी विविध पहलुओ पर, भरपूर मनोरंजन के साथ साथ, उमदा शिक्षा संदेशों की, पाठक गण पर, अमिट छाप छोड़ेगा."
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