हर लम्हा, एक कविता
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हर लम्हा एक कविता - जीवन की तन्हा राहों में छुपे अनगिनत एहसास, कभी फूलों की मुस्कान में, कभी हवाओं के झोंकों में बहता सुकून।प्रकृति की कोमल छाया और रिश्तों की गहराई में, हर पल एक नई कविता जन्म लेती है, जो दिल की गहराइयों से निकली संवेदनाओं को शब्दों में पिरोती है। यह संग्रह उन अनकहे जज़्बातों की दास्तां है, जो नींद से जागते हैं, और हर धड़कन में जीते हैं, हमें याद दिलाते हैं कि ज़िंदगी भी एक अनमोल कविता है।बस ज़रूरत है, हर लम्हे को महसूस करने की - कविता खुद-ब-खुद जन्म लेगी।
हर लम्हा एक कविता - जीवन की तन्हा राहों में छुपे अनगिनत एहसास, कभी फूलों की मुस्कान में, कभी हवाओं के झोंकों में बहता सुकून।प्रकृति की कोमल छाया और रिश्तों की गहराई में, हर पल एक नई कविता जन्म लेती है, जो दिल की गहराइयों से निकली संवेदनाओं को शब्दों में पिरोती है। यह संग्रह उन अनकहे जज़्बातों की दास्तां है, जो नींद से जागते हैं, और हर धड़कन में जीते हैं, हमें याद दिलाते हैं कि ज़िंदगी भी एक अनमोल कविता है।बस ज़रूरत है, हर लम्हे को महसूस करने की - कविता खुद-ब-खुद जन्म लेगी।
AmazonPages: 66, Paperback, Bookleaf Publishing
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