गायत्रीबाला पंडा की कविताएँ समकालीन काव्य-जगत में अपनी अलग पहचान रखती हैं। अपने ब्योरों और रंग-ढंग में अद्वितीय। दया नदी की कविताएँ इसका प्रमाण हैं। ये कविताएँ इतिहास प्रसिद्ध कलिंग युद्ध पर आधारित हैं, जिनमें दया नदी उस ऐतिहासिक युद्ध के दौरान हुए भीषण रक्तपात के बरअक्स मानवीय करुणा और संवेदना के प्रतीक के रूप में दिखलाई पड़ती है। वस्तुतः ये कविताएँ इतिहास की काव्यात्मक चर्चा नहीं हैं, बल्कि उस काव्यात्मक भावना का प्रतिफल हैं जो इतिहास के माध्यम से यात्रा करती है। इनमें इतिहास को एक अलग और व्यक्तिगत दृष्टिकोण से देखा गया है, लेकिन इनका लक्ष्य मनुष्य मात्र का ऐसा भविष्य है जो युद्ध की सभी भयावहताओं से मुक्त हो।
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