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"छोटे शहर की लड़की कहानी-संग्रह में स्त्री को उसके 'सम्पूर्णता' के आइने में देखा गया है। पुरुष मानसिकता के बीच से स्त्री के अस्तित्व की तलाश की गयी है। प्रकृति ने जिस नर और नारी की संरचना की थी वह एक-दूसरे के पूरक के रूप में हैं। नैसर्गिक नियमों की वास्तविकता को आज नये परिवेश में तमाम सच्चाइयों से रूबरू होना पड़ रहा है। स्त्री-विमर्श के प्लेटफार्म पर स्त्री नये अन्दाज में दिख रही है। यह उसका पुरुष हो जाना कतई नहीं है। वह एक कोमल संरचना ही रहेगी। नजर और नज़रिया तभी मायने रखता है जब पारखी सामने हो। पारखी पाठकों के समक्ष यह पुस्तक है।
Productspecificaties
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