Bharat Ki Sanskritik Kahani : Dinkar Granthmala

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Bol भारतीय संस्कृति और सभ्यता को केन्द्र में रखकर लिखी गई यह पुस्तक मुख्य रूप से चार बातों पर रोशनी डालती है। पहली बात वह है जब आर्य इस देश में आए और द्रविड़ जाति से मिलकर उन्होंने उस संस्कृति की नींव डाली जिसे हम हिन्दू अथवा भारतीय संस्कृति कहते हैं। दूसरी बात वह है जब यह संस्कृति कुछ पुरानी हो गई और उसके ख़िलाफ़ महात्मा बुद्ध और महावीर ने विद्रोह किया, जिसके फलस्वरूप बहुत-सी रूढ़ियाँ दूर हुईं और यह संस्कृति एक बार फिर से नवीन हो गई। तीसरी बात वह है जब इस देश में मुसलमान आए और हिन्दू-धर्म का इस्लाम से सम्बन्ध हुआ। और चौथी बात वह है जब भारत की मिट्टी पर हिन्दुत्व और इस्लाम, दोनों का सम्बन्ध ईसाई धर्म और यूरोप के विज्ञान और बुद्धिवाद से हुआ। इन चारों बातों के मद्देनज़र हम कह सकते हैं कि यह पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ का सार रूप है, जिसमें राष्ट्रकवि दिनकर द्वारा सारगर्भित विवेचन प्रस्तुत किया गया है ताकि अनेक तरह के भ्रमों का निराकरण और उनके वास्तविक रूप को उद्घाटित किया जा सके; पहुँचा जा सके किसी मौलिक निष्कर्ष तक। अपने चिन्तन में एक बेहद प्रभावशाली कृति।

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भारतीय संस्कृति और सभ्यता को केन्द्र में रखकर लिखी गई यह पुस्तक मुख्य रूप से चार बातों पर रोशनी डालती है। पहली बात वह है जब आर्य इस देश में आए और द्रविड़ जाति से मिलकर उन्होंने उस संस्कृति की नींव डाली जिसे हम हिन्दू अथवा भारतीय संस्कृति कहते हैं। दूसरी बात वह है जब यह संस्कृति कुछ पुरानी हो गई और उसके ख़िलाफ़ महात्मा बुद्ध और महावीर ने विद्रोह किया, जिसके फलस्वरूप बहुत-सी रूढ़ियाँ दूर हुईं और यह संस्कृति एक बार फिर से नवीन हो गई। तीसरी बात वह है जब इस देश में मुसलमान आए और हिन्दू-धर्म का इस्लाम से सम्बन्ध हुआ। और चौथी बात वह है जब भारत की मिट्टी पर हिन्दुत्व और इस्लाम, दोनों का सम्बन्ध ईसाई धर्म और यूरोप के विज्ञान और बुद्धिवाद से हुआ। इन चारों बातों के मद्देनज़र हम कह सकते हैं कि यह पुस्तक ‘संस्कृति के चार अध्याय’ का सार रूप है, जिसमें राष्ट्रकवि दिनकर द्वारा सारगर्भित विवेचन प्रस्तुत किया गया है ताकि अनेक तरह के भ्रमों का निराकरण और उनके वास्तविक रूप को उद्घाटित किया जा सके; पहुँचा जा सके किसी मौलिक निष्कर्ष तक। अपने चिन्तन में एक बेहद प्रभावशाली कृति।


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  • 9789389243895
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