1 Safalta Ki Asali Paribhasha
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"सम्मानीय पाठक बंधु सादर नमस्कार मैं निखिल द्विवेदी इस किताब के माध्यम से मेरे जो भी छोटे बड़े अनुभव है खट्टे मीठे समय के विचार हैं आप सभी के साथ सांझा कर रहा हूं मैं कोई लेखक नहीं हूं एक कलाकार हूं इसीलिए इस किताब में जो कुछ भी लिखा हुआ है यह मेरी सोच का फल नहीं है वल्कि की समाज की वर्तमान तस्वीर को देखकर मन में उत्पन्न हुए चिंतन का कुछ शाब्दिक रूप है मुझे आश्चर्य होता है कि जो मैं बचपन में किताबों में पढ़ा करता था स्कूल खत्म होने के बाद जब मैंने उस पर अमल करना शुरू किया तो लोग कहने लगे यह क्या कर रहे हो भाई अगर ऐसे करते रहोगे तो जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाओगे यानी यदि ईमानदारी से दो कदम आप चल रहे हैं तो लोग उसे सफलता नहीं मानते इस समाज में जब आप बेईमानी की लंबी छलांग लगाएंगे तो लोग आपको सफल मानेंगे हर व्यक्ति सफल व्यक्ति से उसकी मंजिल की बात करता है कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति से उसके सफर की बात नहीं करता है उसने सफर में कितनी इमानदारी की और कितनी बेईमानी की पाठकों मैं मानता हूं जीवन एक छोटा सा सफर है हर व्यक्ति को किसी ना किसी मंजिल पर पहुंचना है और समाज के सफल होने के दबाव में न जाने कब वह अच्छे रास्ते से बुरे रास्ते पर चलकर सफल होने के लिए नए-नए हथकंडे प्रतिदिन अपना लेता है इसलिए आइए मिलकर एक प्रयास करें कि मंजिल जैसी भी हो वह ईश्वर तय करेगा लेकिन सफर कभी भी बेईमानी का नहीं होना चाहिए पर मैं मानता हूं यही सफलता की असली परिभाषा है कोटि-कोटि धन्यवाद यदि आप सभी ने चाहा तो पुनः एक नई परिभाषा के साथ आप सभी के मध्य उपस्थित होऊंगा तब तक के लिए जय श्री राम - निखिल आर्टिस्ट"
"सम्मानीय पाठक बंधु सादर नमस्कार मैं निखिल द्विवेदी इस किताब के माध्यम से मेरे जो भी छोटे बड़े अनुभव है खट्टे मीठे समय के विचार हैं आप सभी के साथ सांझा कर रहा हूं मैं कोई लेखक नहीं हूं एक कलाकार हूं इसीलिए इस किताब में जो कुछ भी लिखा हुआ है यह मेरी सोच का फल नहीं है वल्कि की समाज की वर्तमान तस्वीर को देखकर मन में उत्पन्न हुए चिंतन का कुछ शाब्दिक रूप है मुझे आश्चर्य होता है कि जो मैं बचपन में किताबों में पढ़ा करता था स्कूल खत्म होने के बाद जब मैंने उस पर अमल करना शुरू किया तो लोग कहने लगे यह क्या कर रहे हो भाई अगर ऐसे करते रहोगे तो जीवन में कभी आगे नहीं बढ़ पाओगे यानी यदि ईमानदारी से दो कदम आप चल रहे हैं तो लोग उसे सफलता नहीं मानते इस समाज में जब आप बेईमानी की लंबी छलांग लगाएंगे तो लोग आपको सफल मानेंगे हर व्यक्ति सफल व्यक्ति से उसकी मंजिल की बात करता है कोई भी व्यक्ति किसी भी व्यक्ति से उसके सफर की बात नहीं करता है उसने सफर में कितनी इमानदारी की और कितनी बेईमानी की पाठकों मैं मानता हूं जीवन एक छोटा सा सफर है हर व्यक्ति को किसी ना किसी मंजिल पर पहुंचना है और समाज के सफल होने के दबाव में न जाने कब वह अच्छे रास्ते से बुरे रास्ते पर चलकर सफल होने के लिए नए-नए हथकंडे प्रतिदिन अपना लेता है इसलिए आइए मिलकर एक प्रयास करें कि मंजिल जैसी भी हो वह ईश्वर तय करेगा लेकिन सफर कभी भी बेईमानी का नहीं होना चाहिए पर मैं मानता हूं यही सफलता की असली परिभाषा है कोटि-कोटि धन्यवाद यदि आप सभी ने चाहा तो पुनः एक नई परिभाषा के साथ आप सभी के मध्य उपस्थित होऊंगा तब तक के लिए जय श्री राम - निखिल आर्टिस्ट"
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